Monday, 1 October 2012

my views on topic of a debate....

आज के युग में चाटुकारिता ( चापलूसी ) आवश्यक गुण है -

मैं ऐसा नहीं मानती I मैं ईमानदारी से किये गए कठिन परिश्रम में विश्वास करती हूँ I यदि लक्ष्य का निर्धारण अपने सामर्थ्य के अनुसार है और सोच विचार कर किया गया है तो व्यक्ति अपने लक्ष्य को अवश्य प्राप्त करेगा जिसके लिए वह  सक्षम है I बस परिश्रम सही दिशा में एवं उचित समय - प्रबंधन के किया गया हो I 

चाटुकारिता का बोलबाला आज से नहीं, सदियों से चला आ रहा है पर एक आत्मविश्वास से भरे परिश्रमी एवं सच्ची लगन वाले दूरदर्शी व्यक्ति को कोई भी रूकावट उसे मंजिल तक पहुँचने से रोक नहीं पाई है I 

अंत में मैं यही कहना चाहूंगी कि हम अपनी मेहनत से हर युग को अनुकूल बना सकते है 


जिस युग में हम हुए, वही तो अपने लिए बड़ा है 
देखो तो, सामने कितना बड़ा कार्यक्षेत्र पड़ा है I